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प्रभु यीशु मनुष्य को उसके पाप से बचने के लिए पृथ्वी पर आए । वह नम्रता में , मनुष्य की समानता में सेवक का स्वरूप धारण करके आए ( फिलिप्पियों २: ७ ) । वह इस संसार के पाप के लिए मरे , गाड़े गए और जी उठे ( १ कुरिन्थियों १५: ४ ), और स्वर्ग में चढ़ गए ( प्रेरितों १: ९ ) । वह पुनरुत्थान के पश्चात प्रेरितों और पांच सौ से भी अधिक विश्वासियों के द्वारा देखे गए । स्वर्ग में चले जाने के बाद दो स्वर्गदूतों ने शिष्यों से कहा कि वह उसी प्रकार लौट कर आएंगे , जिस प्रकार से वह गए हैं । केवल परमेश्वर जानते हैं कि प्रभु कब लौटेंगे । उनके लौटने की बात शाम में हो सकती है या मध्य रात्रि में या सुबह में या दोपहर में ( मार्कुस १३: ३५ ) । “ इसलिए तुम भी तैयार रहो ; क्योंकि जिस पल के विषय में तुम सोचते भी नहीं हो, उसी पल मनुष्य का पुत्र आ जाएगा “ (मत्ती २४:४४ ) ।